Wednesday, May 19, 2010

ख्वाब

मोहलत के ये पल हैं,
खूबसूरत सही पर कम हैं,
किवाड़ पे इन्तेज़ार बैठा है,
सिरहाना रोशनी से भीगा है,

चांदनी के रेशम में,
पलछिन मोती पोरे हैं,
पेशानी पर दिखते हैं,
ख्वाब ये सारे तोरे हैं,

मय के प्याले औंधे हैं,
उलझी रात ये आधी है,
मूंदी पलकें सोई हैं,
वीराने में खोई हैं,

ख्वाबों की ये दुनिया है,
कुछ धुंधली सी कड़ियाँ हैं,
यहाँ सहर होती ही नहीं,
कभी रात सोती ही नहीं,

बोतल भर इन्तेज़ार किया,
प्याली दर प्याली प्यार किया,
यूं खाली पैमाना रात जगे,
लुढके तोरी राह तके,

कांच की बोतल,
कांच के ख्वाब,
खाली प्याले खाली हाथ,
एक रात का सच्चा साथ,

मय का मैं और मेरी तुम,
मैं, मय, ख्वाब और तुम,
मय का ख्वाब,
ख्वाब में तुम......

2 comments:

  1. u r toooo good .....
    :)
    isne to humpe hara rang dala....
    :P

    ReplyDelete
  2. "Mohlat ke yeh pal hain..."

    "Botal bhar intezaar kiya..."

    "Ek raat ka 'sachcha' saath"

    "Mai ka main, aur meri tum..."

    Waah waah. Chhoti-chhoti, baareek, khaalis khoobsoorati hai iss nazm ke har harf mein.

    Marhabaa !

    ReplyDelete